घर – ऐसा हो तो कैसा हो ? Home that can’t be Damaged .

गर जहां खड़े हों – वहीं घर हो ,दिल के कमरे में साफ – सफाई कर , सोफ़ा लगा सुस्ता लें ,थोड़े गुलदस्ते सजा लें ,बेफिक्र फिर कमरे से बाहर झांके ,हवाएं हमें नहीं ज़रा हम हवाओं को छेड़े ,लेकिन जहां खड़े हों – घर वहीं हो ,जब अपना आशियाना अपने दिल में ही बना …

घर – ऐसा हो तो कैसा हो ? Home that can’t be Damaged . Read More »